क्या फैटी लिवर सिरोसिस में बदल सकता है? जानिए सच्चाई और बचाव के तरीके

अगर आपकी रिपोर्ट में फैटी लिवर लिखा है, तो यह जानना बेहद जरूरी है कि क्या फैटी लिवर सिरोसिस में बदल सकता है? क्योंकि कई लोग बिना लक्षण के सालों तक इस समस्या के साथ जीते रहते हैं — और फिर अचानक गंभीर स्टेज पर पहुंच जाते हैं।
सबसे पहले समझते हैं कि फैटी लिवर है क्या। जब हमारे लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है, तो उसे फैटी लिवर कहते हैं। नॉर्मल स्थिति में लिवर में थोड़ा-बहुत फैट होना ठीक है, लेकिन जब यह 5-10% से ज्यादा हो जाए, तो परेशानी शुरू हो जाती है।
मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, अगर फैटी लिवर को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकता है। Mayo Clinic के अनुसार, Non-Alcoholic Fatty Liver Disease (NAFLD) कुछ मामलों में NASH और सिरोसिस में बदल सकती है।
लिवर हमारे शरीर का सबसे मेहनती ऑर्गन है। यह दिन-रात बिना रुके काम करता है —
- शरीर से टॉक्सिन निकालता है
- खाना पचाने में मदद करता है
- विटामिन्स और मिनरल्स स्टोर करता है
- ब्लड को साफ रखता है
सोचिए, अगर यही लिवर धीरे-धीरे फैट से भर जाए तो क्या होगा? बिल्कुल वैसे ही जैसे किसी मशीन में गंदगी भर जाए और उसकी स्पीड कम हो जाए।
आज की Fast Food Lifestyle, ज्यादा चीनी, ज्यादा तेल, कम एक्सरसाइज, देर रात तक जागना — ये सब मिलकर लिवर को अंदर ही अंदर कमजोर कर रहे हैं। सबसे डरावनी बात यह है कि शुरुआत में कोई खास लक्षण नहीं दिखता। सब कुछ सामान्य लगता है… लेकिन अंदर से नुकसान जारी रहता है।
फैटी लिवर दो प्रकार का होता है:-
- Alcoholic Fatty Liver – ज्यादा शराब पीने से
- Non-Alcoholic Fatty Liver (NAFLD) – बिना शराब के, सिर्फ गलत लाइफस्टाइल से
भारत में ज्यादातर लोग NAFLD से जूझ रहे हैं — और उन्हें पता भी नहीं।
अब सवाल उठता है – क्या यही फैटी लिवर आगे चलकर सिरोसिस में बदल सकता है?
इसका जवाब सुनकर शायद आप चौंक जाएं…
लिवर का काम और इसकी अहमियत

हम अक्सर दिल और दिमाग की बात करते हैं, लेकिन लिवर? उसे तो जैसे भूल ही जाते हैं। जबकि सच यह है कि अगर लिवर 24 घंटे के लिए काम करना बंद कर दे, तो जिंदगी खतरे में पड़ सकती है।
लिवर हमारे शरीर का “Chemical Factory” है। यह लगभग 500 से ज्यादा जरूरी काम करता है। कल्पना कीजिए, एक ऐसा ऑर्गन जो बिना छुट्टी लिए हर सेकंड काम करता है।
लिवर के मुख्य काम:
- खून को साफ करना
- दवाइयों को प्रोसेस करना
- पाचन के लिए बाइल (Bile) बनाना
- शरीर की एनर्जी को स्टोर करना
- प्रोटीन बनाना
जब हम जंक फूड खाते हैं, सॉफ्ट ड्रिंक पीते हैं या बहुत ज्यादा मीठा खाते हैं, तो लिवर को उसे प्रोसेस करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। धीरे-धीरे यह मेहनत बोझ बन जाती है।
अब सोचिए, अगर लिवर पर रोज-रोज फैट जमा होता जाए तो क्या होगा?
शुरुआत में यह सिर्फ “Fatty Liver Grade 1” होगा।
फिर “Grade 2”…
फिर “Grade 3”…
और अगर अभी भी हमने लाइफस्टाइल नहीं बदली, तो मामला इंफ्लेमेशन तक पहुंच सकता है — जिसे NASH कहा जाता है।
यहीं से खतरा शुरू होता है। क्योंकि NASH से ही आगे चलकर सिरोसिस बन सकता है।
लिवर की खास बात यह है कि यह खुद को ठीक करने की क्षमता रखता है। लेकिन इसकी भी एक लिमिट होती है। अगर हम लगातार इसे नुकसान पहुंचाते रहें, तो एक दिन यह हार मान लेता है।
क्या आप अपने लिवर को उस हालत में देखना चाहेंगे जहां वह रिकवर ही न कर सके?
फैटी लिवर कैसे बनता है?

फैटी लिवर अचानक नहीं बनता। यह धीरे-धीरे, सालों में बनता है — और हम रोज इसकी ईंटें जोड़ते रहते हैं।
मुख्य कारण:
- ज्यादा मीठा (Sugar, Fructose Syrup)
- प्रोसेस्ड फूड
- डीप फ्राइड स्नैक्स
- ज्यादा कार्बोहाइड्रेट
- मोटापा
- इंसुलिन रेजिस्टेंस
आजकल की लाइफस्टाइल में लोग घंटों बैठकर काम करते हैं। ऑफिस, लैपटॉप, मोबाइल, टीवी — सब कुछ “Sitting Mode” में। शरीर मूव नहीं करता, लेकिन कैलोरी अंदर जाती रहती है।
जब शरीर अतिरिक्त फैट को स्टोर करने की जगह नहीं ढूंढ पाता, तो वह उसे लिवर में जमा करने लगता है।
यह बिल्कुल वैसे है जैसे घर में जगह खत्म हो जाए और आप सामान स्टोररूम में ठूंसना शुरू कर दें। शुरुआत में सब ठीक लगता है, लेकिन एक दिन स्टोररूम भर जाता है — और दरवाजा बंद नहीं होता।
यही स्थिति लिवर के साथ होती है।
सबसे बड़ी गलती क्या है?
लोग सोचते हैं – “मैं शराब नहीं पीता, मुझे फैटी लिवर नहीं होगा।”
लेकिन सच्चाई यह है कि आज भारत में Non-Alcoholic Fatty Liver ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है।
डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा — ये सब मिलकर लिवर को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
और जब फैट के साथ इंफ्लेमेशन जुड़ जाता है, तो यह खतरनाक स्टेज की ओर बढ़ता है।
यही वह मोड़ है जहां से कहानी सिरोसिस की तरफ जा सकती है…
क्या सच में फैटी लिवर सिरोसिस में बदल सकता है?

अब सबसे बड़ा सवाल — क्या फैटी लिवर सच में सिरोसिस में बदल सकता है?
दिल थामकर सच्चाई सुनिए… हाँ, बदल सकता है। लेकिन हर किसी में नहीं। और यही जगह है जहां उम्मीद भी है और खतरा भी।
फैटी लिवर अपने आप में शुरुआत है, अंत नहीं। लेकिन अगर इसे नजरअंदाज किया जाए, लाइफस्टाइल वही रहे, वजन बढ़ता जाए, डायबिटीज कंट्रोल में न हो — तो यह धीरे-धीरे एक खतरनाक दिशा में बढ़ सकता है। यह सफर अचानक नहीं होता। यह सालों में बनता है, और हम इसे महसूस भी नहीं कर पाते।
लिवर पर जब लगातार फैट जमा रहता है, तो वह सिर्फ मोटा नहीं होता — उसमें सूजन (Inflammation) भी आने लगती है। यह सूजन ही असली दुश्मन है। क्योंकि सूजन से लिवर की कोशिकाएं (cells) डैमेज होने लगती हैं। जब यह डैमेज बार-बार होता है, तो शरीर उसे ठीक करने की कोशिश करता है। लेकिन बार-बार रिपेयर के कारण वहां निशान (scar tissue) बनने लगते हैं।
यही scar tissue आगे चलकर Fibrosis और फिर Cirrhosis में बदल सकता है।
ध्यान रखिए:
- हर फैटी लिवर सिरोसिस नहीं बनता
- लेकिन हर सिरोसिस की शुरुआत किसी न किसी डैमेज से ही होती है
सबसे खतरनाक बात क्या है?
लोग कहते हैं — “मुझे तो कोई दर्द नहीं है।”
लेकिन लिवर का डैमेज अक्सर दर्द के बिना होता है। यह चुपचाप, बिना आवाज किए, अंदर ही अंदर बढ़ता है।
अगर अभी भी आप सोच रहे हैं — “मेरे साथ नहीं होगा”…
तो एक बार अपनी रिपोर्ट उठाकर देखिए। Grade 1 आज है, लेकिन 5 साल बाद?
फैटी लिवर से NASH तक का सफर

फैटी लिवर का अगला स्टेज होता है — NASH (Non-Alcoholic Steatohepatitis)। नाम भले ही कठिन हो, लेकिन इसका मतलब बहुत साफ है:
फैट + सूजन + लिवर सेल डैमेज।
यह वही मोड़ है जहां से खतरा गंभीर हो जाता है।
मान लीजिए आपके लिवर में सिर्फ फैट है, लेकिन सूजन नहीं है — तो इसे संभाला जा सकता है। लेकिन जब फैट के साथ इंफ्लेमेशन जुड़ जाता है, तो स्थिति बदल जाती है। अब लिवर सिर्फ “मोटा” नहीं है, बल्कि “बीमार” हो चुका है।
NASH में:
- लिवर की कोशिकाएं टूटने लगती हैं
- शरीर उन्हें रिपेयर करने की कोशिश करता है
- बार-बार डैमेज से निशान बनने लगते हैं
यह प्रक्रिया सालों तक चल सकती है। कोई खास लक्षण नहीं। बस हल्की थकान, पेट में भारीपन, या कभी-कभी कुछ भी नहीं।
यही वजह है कि इसे Silent Progression कहा जाता है।
अगर इस स्टेज पर भी ध्यान न दिया जाए, तो Fibrosis शुरू होता है। और Fibrosis बढ़ते-बढ़ते Cirrhosis बन सकता है।
यह सफर कुछ लोगों में 10-15 साल ले सकता है, कुछ में कम।
डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा — यह सब इस प्रक्रिया को तेज कर देते हैं।
अब सवाल है — क्या NASH से वापस लौटा जा सकता है?
हाँ, लेकिन समय रहते।
NASH से सिरोसिस तक की प्रक्रिया

जब लिवर बार-बार सूजन और डैमेज झेलता है, तो वह खुद को बचाने के लिए scar tissue बनाता है। शुरू में यह कम होता है — जिसे Fibrosis कहते हैं। लेकिन अगर डैमेज जारी रहे, तो यह scar tissue पूरे लिवर में फैलने लगता है।
अब लिवर की संरचना (structure) बदलने लगती है।
ब्लड फ्लो रुकने लगता है।
लिवर की कार्यक्षमता कम होने लगती है।
यही स्थिति Cirrhosis कहलाती है।
सिरोसिस में:
- लिवर सिकुड़ जाता है
- हार्ड हो जाता है
- ठीक से काम नहीं कर पाता
यह स्टेज खतरनाक है क्योंकि:
- लिवर फेलियर हो सकता है
- पेट में पानी भर सकता है (Ascites)
- खून की उल्टी हो सकती है
- लिवर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है
सबसे दर्दनाक सच्चाई?
सिरोसिस का डैमेज अक्सर स्थायी होता है। इसे पूरी तरह रिवर्स करना बहुत मुश्किल होता है।
इसलिए असली लड़ाई फैटी लिवर के स्टेज पर ही जीतनी है।
90% लोग जो बड़ी गलती कर रहे हैं

अब वह बात जो शायद आपको चुभेगी।
90% लोग फैटी लिवर को सीरियस नहीं लेते।
रिपोर्ट आती है, डॉक्टर कहते हैं “वजन कम कीजिए” — और हम सोचते हैं, “कर लेंगे।”
लेकिन करते कब हैं?
- जिम का प्लान अगले महीने
- डाइट सोमवार से
- मीठा कम करेंगे, लेकिन आज पार्टी है
- कोल्ड ड्रिंक कभी-कभार… जो हर दिन हो जाता है
यह “छोटी-छोटी” गलतियां सालों में बड़ी बीमारी बन जाती हैं।
सबसे बड़ी गलती क्या है?
लोग लक्षण आने का इंतजार करते हैं।
लेकिन फैटी लिवर में लक्षण अक्सर देर से आते हैं। जब तक लक्षण दिखते हैं, डैमेज काफी आगे बढ़ चुका होता है।
अगर आपकी कमर का साइज बढ़ रहा है, अगर आप थकान महसूस करते हैं, अगर आपका ब्लड शुगर हाई है — तो समझ जाइए कि लिवर पर भी असर पड़ रहा है।
यह बीमारी अचानक नहीं आती।
यह हमारी रोज की आदतों का परिणाम है।
अनहेल्दी लाइफस्टाइल और जंक फूड

आज की लाइफस्टाइल लिवर के खिलाफ साजिश जैसी है।
सुबह नाश्ता छोड़ना।
दोपहर में बाहर का खाना।
शाम को चाय के साथ बिस्किट।
रात में देर से खाना।
और ऊपर से कोई एक्सरसाइज नहीं।
जंक फूड में:
- Trans fats
- Refined carbs
- High sugar
- Preservatives
ये सब लिवर पर बोझ डालते हैं।
सबसे खतरनाक चीज है “Liquid Sugar” — यानी कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस, एनर्जी ड्रिंक्स। इनमें Fructose ज्यादा होता है, जो सीधे लिवर में फैट में बदलता है।
आप सोचते हैं — “मैं तो सिर्फ जूस पी रहा हूं।”
लेकिन लिवर के लिए वह शुगर बम जैसा है।
लंबे समय तक ऐसा खाना लिवर को Fat Storage Center बना देता है।
शराब और मीठे पेय पदार्थों का असर

अगर शराब शामिल हो जाए, तो खतरा दोगुना हो जाता है।
Alcohol लिवर की कोशिकाओं को सीधे नुकसान पहुंचाता है।
अगर पहले से फैटी लिवर है और ऊपर से शराब भी, तो यह आग में घी डालने जैसा है।
मीठे पेय पदार्थ भी कम खतरनाक नहीं हैं।
Fructose metabolism सीधे लिवर में होता है, और यह फैट बनने की प्रक्रिया को तेज करता है।
याद रखिए:
- रोज की छोटी मात्रा भी लंबे समय में नुकसान कर सकती है
- “सिर्फ वीकेंड” भी सालों में बड़ा असर डाल सकता है
अगर लिवर बोल पाता, तो शायद वह कहता —
“बस करो… मुझे भी आराम चाहिए।”
फैटी लिवर के शुरुआती लक्षण – जिन्हें लोग नजरअंदाज करते हैं

सबसे खतरनाक बात क्या है? फैटी लिवर अक्सर बिना शोर के आता है। न तेज दर्द, न कोई बड़ा अलार्म। बस धीरे-धीरे अंदर से सब बदलता रहता है। यही वजह है कि लोग इसे “Silent Disease” कहते हैं।
शुरुआती लक्षण इतने हल्के होते हैं कि हम उन्हें रोजमर्रा की थकान समझकर टाल देते हैं। जैसे:
- हमेशा थकान महसूस होना
- पेट के दाहिने हिस्से में हल्का भारीपन
- गैस, अपच या ब्लोटिंग
- अचानक वजन बढ़ना
- भूख कम लगना
अब सोचिए, इनमें से कौन-सा लक्षण ऐसा है जिसे हम सीरियस लेते हैं? शायद कोई भी नहीं। हम कहते हैं – “कल से ठीक हो जाएगा।” लेकिन वह कल अक्सर सालों में बदल जाता है।
कुछ लोगों को हल्की-सी स्किन पर खुजली, बालों का झड़ना, या मानसिक सुस्ती भी महसूस होती है। लेकिन वे इसे स्ट्रेस या मौसम का असर समझ लेते हैं। सच्चाई यह है कि जब लिवर ठीक से काम नहीं करता, तो शरीर के हर हिस्से पर असर पड़ता है।
यह बिल्कुल वैसे है जैसे घर की पानी की मोटर धीरे-धीरे कमजोर हो रही हो। शुरू में सिर्फ पानी का प्रेशर कम लगता है, लेकिन एक दिन मोटर पूरी तरह बंद हो जाती है।
अगर आप बार-बार थकान महसूस कर रहे हैं, और आपकी लाइफस्टाइल भी हेल्दी नहीं है, तो यह सिर्फ “सामान्य कमजोरी” नहीं हो सकती। यह आपके लिवर की धीमी पुकार भी हो सकती है।
क्यों यह ‘Silent Disease’ कहलाता है?
लिवर की एक खासियत है — यह दर्द नहीं करता, जब तक कि डैमेज बहुत ज्यादा न हो जाए। यही वजह है कि फैटी लिवर और यहां तक कि शुरुआती सिरोसिस भी बिना लक्षण के रह सकता है।
हमारा शरीर कई बार एडजस्ट करता रहता है। लिवर की 70% क्षमता खत्म हो जाने के बाद भी इंसान को सामान्य महसूस हो सकता है। क्या आप सोच सकते हैं? इतना डैमेज, और फिर भी कोई तेज संकेत नहीं।
इसलिए इसे Silent Disease कहा जाता है। यह चुपचाप बढ़ता है। कोई तेज बुखार नहीं, कोई असहनीय दर्द नहीं। बस धीरे-धीरे लिवर की कोशिकाएं डैमेज होती रहती हैं।
लोग अक्सर तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं जब:
- पेट में पानी भर जाता है
- आंखें और त्वचा पीली होने लगती हैं (Jaundice)
- खून की उल्टी होती है
- अचानक बहुत ज्यादा कमजोरी आती है
लेकिन तब तक बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है।
यही कारण है कि Regular Health Checkup बहुत जरूरी है। खासकर अगर:
- आपका वजन ज्यादा है
- डायबिटीज है
- कोलेस्ट्रॉल हाई है
- पेट बाहर निकला हुआ है
लिवर चुप है, लेकिन खतरा चुप नहीं है।
सिरोसिस क्या है और यह कितना खतरनाक है?
सिरोसिस वह स्थिति है जब लिवर का स्वस्थ टिशू लगभग खत्म होकर उसकी जगह कठोर scar tissue ले लेता है। यह ऐसा है जैसे एक नरम स्पंज पत्थर में बदल जाए।
जब लिवर हार्ड हो जाता है, तो:
- ब्लड फ्लो रुकने लगता है
- टॉक्सिन शरीर में जमा होने लगते हैं
- पाचन प्रक्रिया प्रभावित होती है
- शरीर में सूजन बढ़ने लगती है
सिरोसिस सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि कई खतरनाक समस्याओं का दरवाजा है। यह लिवर फेलियर और लिवर कैंसर का जोखिम बढ़ा देता है।
सिरोसिस के दो मुख्य स्टेज होते हैं:
- Compensated Cirrhosis – जब लिवर अभी भी कुछ हद तक काम कर रहा होता है
- Decompensated Cirrhosis – जब लक्षण गंभीर हो जाते हैं और जटिलताएं शुरू हो जाती हैं
Decompensated स्टेज में:
- पेट में पानी भरना
- खून की उल्टी
- मानसिक भ्रम (Hepatic Encephalopathy)
- बार-बार अस्पताल में भर्ती होना
यह स्थिति जीवन के लिए खतरनाक हो सकती है।
सबसे दुखद बात?
सिरोसिस का डैमेज अक्सर स्थायी होता है। लिवर ट्रांसप्लांट ही अंतिम विकल्प बन सकता है।
क्या यह सब सिर्फ इसलिए कि हमने “Grade 1 Fatty Liver” को हल्के में लिया?
कौन लोग ज्यादा जोखिम में हैं?
हर व्यक्ति में फैटी लिवर सिरोसिस नहीं बनता। लेकिन कुछ लोग ज्यादा जोखिम में होते हैं।
डायबिटीज और मोटापा
अगर आपको टाइप 2 डायबिटीज है, तो फैटी लिवर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस लिवर में फैट जमा होने की प्रक्रिया को तेज करता है।
मोटापा, खासकर पेट की चर्बी (Belly Fat), सबसे बड़ा जोखिम है। अगर आपकी कमर:
- पुरुषों में 90 सेमी से ज्यादा
- महिलाओं में 80 सेमी से ज्यादा
तो यह सिर्फ सौंदर्य का मुद्दा नहीं, बल्कि हेल्थ अलार्म है।
बैठे रहने वाली लाइफस्टाइल
दिन भर बैठना, कम चलना, कोई एक्सरसाइज नहीं — यह लिवर के लिए धीमा जहर है।
अगर आपकी लाइफ कुछ ऐसी है:
- ऑफिस चेयर
- कार
- सोफा
- बेड
तो शरीर को फैट जलाने का मौका ही नहीं मिलता।
क्या फैटी लिवर रिवर्स हो सकता है?
अब सबसे राहत देने वाली बात।
हाँ, फैटी लिवर शुरुआती स्टेज में पूरी तरह रिवर्स हो सकता है।
लिवर में खुद को ठीक करने की अद्भुत क्षमता होती है। अगर आप:
- 7-10% वजन कम कर लें
- रोज 30-45 मिनट वॉक करें
- चीनी और प्रोसेस्ड फूड कम करें
- शराब बंद करें
तो लिवर धीरे-धीरे सामान्य हो सकता है।
लेकिन शर्त एक है — लगातार प्रयास।
यह कोई 10 दिन का चैलेंज नहीं है। यह लाइफस्टाइल बदलाव है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि शुरुआती स्टेज में लाइफस्टाइल बदलाव से सुधार संभव है। Cleveland Clinic की मेडिकल गाइडलाइन के अनुसार, वजन कम करने और नियमित एक्सरसाइज से लिवर फैट घटाया जा सकता है।
डाइट से सुधार संभव है?
बिल्कुल।
लिवर को ठीक करने के लिए कोई जादुई दवा नहीं, लेकिन सही डाइट चमत्कार कर सकती है।
क्या खाएं:
- हरी सब्जियां
- फल (सीमित मात्रा में)
- साबुत अनाज
- दालें
- नट्स
- ओमेगा-3 युक्त भोजन
क्या कम करें:
- सफेद चीनी
- मैदा
- तला हुआ खाना
- पैकेज्ड स्नैक्स
Mediterranean Diet को फैटी लिवर में फायदेमंद माना जाता है।
एक्सरसाइज और वेट लॉस का असर
सिर्फ डाइट नहीं, मूवमेंट जरूरी है।
रोज 30 मिनट तेज चलना भी काफी है।
अगर जिम नहीं जा सकते, तो:
- सीढ़ियां चढ़ें
- घर के काम करें
- योग करें
- साइक्लिंग करें
वजन घटाने से लिवर में जमा फैट कम होने लगता है। 3-6 महीनों में रिपोर्ट में सुधार दिख सकता है।
यह एक यात्रा है, स्प्रिंट नहीं।
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निष्कर्ष
क्या फैटी लिवर सिरोसिस में बदल सकता है?
हाँ, अगर हमने उसे नजरअंदाज किया तो।
लेकिन क्या इसे रोका जा सकता है?
बिल्कुल हाँ।
आज लिया गया छोटा फैसला — कम चीनी, रोज वॉक, वजन कंट्रोल — आपको आने वाले वर्षों की बड़ी बीमारी से बचा सकता है।
लिवर चुप है, लेकिन आप चुप मत रहिए।
आज संभल जाइए, ताकि कल पछताना न पड़े।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या फैटी लिवर हमेशा सिरोसिस में बदलता है?
नहीं, हर मामले में नहीं। लेकिन अगर लाइफस्टाइल नहीं बदली गई, तो जोखिम बढ़ जाता है।
2. क्या बिना शराब पिए भी सिरोसिस हो सकता है?
हाँ, Non-Alcoholic Fatty Liver भी सिरोसिस में बदल सकता है।
3. फैटी लिवर ठीक होने में कितना समय लगता है?
अगर वजन कम किया जाए और डाइट सुधारी जाए, तो 3-6 महीनों में सुधार दिख सकता है।
4. क्या फैटी लिवर में दर्द होता है?
अधिकतर मामलों में नहीं। यही वजह है कि इसे Silent Disease कहा जाता है।
5. क्या सिरोसिस पूरी तरह ठीक हो सकता है?
शुरुआती स्टेज में प्रोग्रेशन रोका जा सकता है, लेकिन एडवांस स्टेज में डैमेज स्थायी हो सकता है।
