विटामिन B12 की कमी किस वजह से होती है? | Vitamin B12 Ki Kami Kis Wajah Se Hoti Hai?

Vitamin B12 Ki Kami Kis Wajah Se Hoti Hai in Hindi: स्वास्थ्य हमारे जीवन का वह आधार है जिस पर हमारी खुशियाँ, सपने और रोजमर्रा की ऊर्जा टिकी होती है। कई बार हम काम, परिवार और भागदौड़ में इतने उलझ जाते हैं कि शरीर के संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं। थकान, चक्कर, सांस फूलना या हल्का-सा तनाव हमें सामान्य लगता है, लेकिन कई बार ये छोटे-छोटे बदलाव शरीर में विटामिन B12 की कमी का संकेत होते हैं।
आज हम इसी विषय पर गहराई से बात करने वाले हैं—
विटामिन B12 की कमी किस वजह से होती है? (Vitamin B12 Ki Kami Kis Wajah Se Hoti Hai?)
यह लेख आपको न केवल जानकारी देगा बल्कि आपके अंदर जागरूकता और अपने शरीर को समझने की संवेदनशीलता भी बढ़ाएगा।
- विटामिन B12 क्या है और यह इतना जरूरी क्यों है?
- विटामिन B12 की कमी किस वजह से होती है?
- विटामिन B12 की कमी के लक्षण
- कमी का पता कैसे चले?
- विटामिन B12 की कमी कैसे दूर करें?
- क्या विटामिन B12 की कमी खतरनाक है?
- विटामिन B12 की कमी व्यक्ति की जीवनशैली को कैसे बदल देती है?
- भारत में विटामिन B12 की कमी इतनी आम क्यों है?
- विटामिन B12 की कमी का प्रभाव बच्चों और युवाओं पर
- लोग क्यों समय रहते टेस्ट नहीं करवाते?
- विटामिन B12 और मानसिक स्वास्थ्य
- क्या विटामिन B12 की कमी पूरी तरह ठीक हो सकती है?
- विटामिन B12 को जीवनभर कैसे संतुलित रखें?
- निष्कर्ष (Conclusion)
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
विटामिन B12 क्या है और यह इतना जरूरी क्यों है?

विटामिन B12 वह पोषक तत्व है जो आपकी हर सांस, हर कदम और हर विचार तक को प्रभावित करता है।
यह विटामिन शरीर में—
- लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण
- नसों की सुरक्षा
- दिमाग के सही कार्य
- ऊर्जा उत्पादन
- DNA सिंथेसिस
जैसे महत्वपूर्ण काम करता है।
यही वजह है कि इसकी कमी धीरे-धीरे पूरे शरीर को असंतुलित कर सकती है, और इंसान जान भी नहीं पाता कि उसके साथ क्या हो रहा है।
विटामिन B12 की कमी किस वजह से होती है? | Vitamin B12 Ki Kami Kis Wajah Se Hoti Hai?
नीचे बताए गए कारण सबसे सामान्य हैं, लेकिन एक ही व्यक्ति में कमी के कई कारण एक साथ भी मौजूद हो सकते हैं।
1. भोजन में विटामिन B12 का कम सेवन (Dietary Deficiency)

विटामिन B12 मुख्य रूप से पशु-आधारित खाद्य पदार्थों में पाया जाता है, जैसे—
- अंडे
- मांस
- मछली
- डेयरी प्रोडक्ट्स
- चीज़
भारत में बड़ी आबादी शाकाहारी है और उनकी डाइट में B12 स्वाभाविक रूप से बहुत कम होता है।
इसलिए वे लोग अक्सर बिना जाने इसकी कमी से जूझते रहते हैं।
कई लोग जीवनभर मेहनत करते हैं, परिवार का ख्याल रखते हैं, लेकिन खुद क्या खा रहे हैं—इस पर ध्यान नहीं दे पाते। धीरे-धीरे शरीर अपनी शिकायत कमजोरी के रूप में दिखाना शुरू करता है।
2. पाचन तंत्र द्वारा B12 को अवशोषित न कर पाना (Malabsorption)

कई बार हमारी डाइट ठीक होती है लेकिन शरीर उसे ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता।
इसके कारण—
- एसिडिटी की दवाओं का लंबे समय तक उपयोग
- पेट की सर्जरी
- गैस्ट्रिक समस्याएँ
- अल्सर
- इंटेस्टाइन से जुड़ी बीमारियाँ
B12 के अवशोषण को रोक सकती हैं।
बहुत से लोग पेट की जलन या गैस को मामूली परेशानी समझकर सालों दवाएँ लेते रहते हैं। लेकिन यही आम दवाएँ धीरे-धीरे B12 लेवल को गिराती हैं और कमजोरी की एक नई कहानी जन्म लेती है।
3. उम्र बढ़ने के साथ अवशोषण क्षमता कम होना

40–45 वर्ष की उम्र पार करने के बाद पेट में बनने वाला एसिड कम होने लगता है।
इसी एसिड की मदद से B12 शरीर में अवशोषित होता है, इसलिए उम्र बढ़ने पर इसकी कमी स्वाभाविक रूप से अधिक देखी जाती है।
उम्र बढ़ना कोई गलती नहीं है, लेकिन शरीर की जरूरतों को न समझना गलती है।
अपने लिए समय निकालना भी आत्म-सम्मान का हिस्सा है।
4. पर्निशियस एनीमिया (Pernicious Anemia)
यह एक ऑटोइम्यून स्थिति है जिसमें शरीर Intrinsic Factor नामक प्रोटीन बनाना बंद कर देता है, जो B12 को अवशोषित करने के लिए जरूरी है।
यह कम दिखाई देने वाली लेकिन गंभीर वजह है।
5. वेगन और स्ट्रिक्ट वेजिटेरियन डाइट
वेगन डाइट में B12 लगभग नहीं होता।
ऐसे में केवल प्लांट-बेस्ड डाइट पर निर्भर रहने वाले लोगों में इसकी कमी होना स्वाभाविक है।
6. गर्भावस्था और स्तनपान में बढ़ी हुई जरूरत
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में B12 की जरूरत बढ़ जाती है।
यदि डाइट संतुलित न हो तो माँ और बच्चे—दोनों में कमी हो सकती है।
7. अल्कोहल का सेवन
अत्यधिक शराब पीने से—
- पेट की दीवार कमजोर होती है
- अवशोषण कम हो जाता है
- लीवर की क्षमता घटती है
इससे B12 लेवल नीचे गिर सकता है।
8. कुछ दवाओं का साइड इफेक्ट
लंबे समय तक उपयोग से B12 कम करने वाली दवाइयाँ—
- Metformin (डायबिटीज की दवा)
- Proton Pump Inhibitors (एसिडिटी की दवा)
- H2 Blockers
ऐसे लोग अक्सर थकान या सुस्ती को उम्र या शुगर से जोड़ लेते हैं, जबकि असली वजह B12 की कमी होती है।
9. तनाव एवं अनियमित जीवनशैली

सीधा संबंध तो नहीं, लेकिन—
- नींद की कमी
- अनियमित भोजन
- लंबे समय का मानसिक तनाव
शरीर के पोषक तत्वों के उपयोग को प्रभावित करते हैं, जिससे B12 का स्तर भी गिर सकता है।
विटामिन B12 की कमी के लक्षण (Symptoms)

जब शरीर में B12 कम होने लगता है, तो यह शुरुआत में मामूली संकेत देता है—
- लगातार थकान
- सांस फूलना
- हाथ-पैर में झुनझुनी
- याददाश्त कमजोर होना
- मन बेचैन या उदास लगना
- चक्कर आना
- जीभ में जलन
- आंखों के नीचे काले घेरे
- दिल की धड़कन तेज होना
इनमें से कई लक्षण ऐसे होते हैं जो रोजमर्रा की थकान की तरह लगते हैं।
लेकिन अंदर की कहानी कुछ और होती है।
कमी का पता कैसे चले? (Diagnosis)
यदि आपको ऊपर बताए गए लक्षण नज़र आ रहे हैं, तो डॉक्टर B12 लेवल जांचने के लिए एक साधारण ब्लड टेस्ट करवाते हैं—
- Serum B12 Test
- Methylmalonic Acid Test
- Homocysteine Level
इन जांचों से स्पष्ट पता चल जाता है कि शरीर कितनी कमी से गुजर रहा है।
विटामिन B12 की कमी कैसे दूर करें? (Natural Ways)
विटामिन B12 की कमी भी ऐसी ही एक स्थिति है जो न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है बल्कि मानसिक संतुलन और भावनात्मक स्थिरता पर भी असर डालती है।
✔ 1. अपनी डाइट में बदलाव

NIH के अनुसार Vitamin B12 की कमी की दूर करने के लिए अपने डाइट में निम्नलिखित चीजों को शामिल करें—
- दूध, छाछ
- पनीर
- दही
- अंडे
- चिकन, मछली
- फोर्टिफाइड अनाज
✔ 2. सप्लीमेंट्स (डॉक्टर की सलाह से)
टैबलेट, ड्रॉप्स या इंजेक्शन—यह कमी के स्तर पर निर्भर करता है।
✔ 3. पेट से जुड़ी बीमारियों का इलाज
यदि अवशोषण की समस्या है तो उसका इलाज सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
✔ 4. तनाव कम करें
योग, ध्यान और पर्याप्त नींद पोषक तत्वों के उपयोग को बेहतर बनाते हैं।
क्या विटामिन B12 की कमी खतरनाक है?
हाँ, अगर इसे लंबे समय तक अनदेखा किया जाए तो—
- तंत्रिका तंत्र को नुकसान
- गंभीर एनीमिया
- याददाश्त कमजोर
- मूड डिसऑर्डर
- चलने-फिरने में कमजोरी
जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
इसलिए इसे शुरुआत में ही पहचान कर ठीक करना जरूरी है।
हम सब अपनी जिंदगी में कई जिम्मेदारियाँ निभाते हैं—
परिवार के लिए दौड़-धूप, काम का तनाव, और समय की कमी के बीच अक्सर हम खुद को ही भूल जाते हैं।
विटामिन B12 की कमी सिर्फ एक पोषक तत्व की कमी नहीं है,
यह संकेत है कि आपके शरीर को आपकी जरूरत है ।
अपनी थकान को सामान्य मत मानिए।
अपने शरीर की आवाज को सुनिए।
क्योंकि सेहत वही है—जो हर सुबह आपको मुस्कुराने की ताकत देती है।
विटामिन B12 की कमी व्यक्ति की जीवनशैली को कैसे बदल देती है?

विटामिन B12 की कमी धीरे-धीरे व्यक्ति के जीवन में ऐसे बदलाव लाती है जो उसके सोचने, काम करने और महसूस करने की क्षमता को प्रभावित करते हैं।
1. कामकाजी जीवन पर प्रभाव
दफ्तर में ध्यान केंद्रित करना कठिन हो जाता है।
छोटे-छोटे काम भी बड़े लगने लगते हैं।
हर समय थकान या भारीपन सा महसूस होना व्यक्ति को उसके ही काम से दूर कर देता है।
कई बार यह स्थिति करियर ग्रोथ को भी रोक देती है, क्योंकि व्यक्ति के अंदर वह ऊर्जा नहीं बचती जो पहले हुआ करती थी।
2. रिश्तों में बदलाव
लगातार कमजोरी, चिड़चिड़ापन या मानसिक थकान व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव लाती है।
परिवार वाले सोचते हैं कि व्यक्ति तनाव में है, जबकि अंदर का कारण सिर्फ एक पोषक तत्व की कमी होती है।
यह भावनात्मक दूरी रिश्तों पर अनजाने में असर डाल देती है।
3. आत्मविश्वास में कमी
जब दिमाग तेज़ी से काम नहीं करता, याददाश्त कमजोर होती है या हर काम में मन नहीं लगता—
तो इंसान धीरे-धीरे खुद पर शंका करने लगता है।
वह सोचता है कि शायद उसमें ही कमी है, जबकि असली वजह शरीर की कमी है।
भारत में विटामिन B12 की कमी इतनी आम क्यों है?
भारत में B12 की कमी एक बढ़ती हुई स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। इसके पीछे कुछ खास कारण हैं—
1. शाकाहारी खानपान की अधिकता
भारत में कई लोग धार्मिक या सांस्कृतिक कारणों से पशु-जन्य भोजन नहीं खाते।
इससे B12 की प्राकृतिक मात्रा डाइट में शामिल नहीं हो पाती।
2. प्रसंस्कृत भोजन (Processed Food) का बढ़ता उपयोग

जंक फूड, पैकेज्ड स्नैक्स और इंस्टेंट प्रोडक्ट्स में कोई भी प्राकृतिक विटामिन B12 नहीं होता।
इसके बावजूद लोग इन्हें तेजी से अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं।
3. मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी
फसलों की गुणवत्ता पहले जैसी नहीं रही है।
मिट्टी से मिलने वाले माइक्रोन्यूट्रिएंट्स कम हो चुके हैं, जिससे पौधों और अनाज की पोषण क्षमता भी कम हुई है—हालाँकि B12 सीधे पौधों में नहीं बनता, लेकिन समग्र पोषण स्तर गिरने से शरीर और अधिक संवेदनशील हो गया है।
4. तनावपूर्ण जीवन
तेजी से बदलती जिंदगी, लंबे कार्य घंटे और सोशल मीडिया का दबाव मानसिक तनाव बढ़ाता है, जो अप्रत्यक्ष रूप से शरीर के पोषक तत्वों की खपत को प्रभावित करता है।
विटामिन B12 की कमी का प्रभाव बच्चों और युवाओं पर

B12 की कमी को अक्सर बुजुर्गों की समस्या माना जाता है, जबकि आज के समय में यह बच्चों और युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है।
✔ स्कूल जाने वाले बच्चे
- ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
- बार-बार थकान
- पढ़ाई में रुचि कम होना
- नींद की गुणवत्ता प्रभावित होना
ये सिर्फ पढ़ाई से जुड़ी समस्याएँ नहीं हैं—कई बार ये B12 की कमी के शुरुआती संकेत होते हैं।
✔ युवा वर्ग
प्रत्येक युवा अपने भविष्य की तैयारी में व्यस्त है, लेकिन—
- जिम में ज्यादा थकान
- दिमाग पर काम का बोझ
- देर रात का जगना
- Instant food पर निर्भरता
ये सब उनकी B12 जरूरत को बढ़ा देते हैं।
कमी का अनजाना डर—लोग क्यों समय रहते टेस्ट नहीं करवाते?
यह एक दिलचस्प लेकिन वास्तविक सवाल है।
कई लोग कमज़ोरी या सुस्ती को “सामान्य थकान” मान लेते हैं।
वे सोचते हैं कि शायद काम ज़्यादा है, नींद कम हुई है या मौसम बदलने से शरीर भारी लग रहा है।
असल में, यही सोच उन्हें असली समस्या तक पहुँचने से रोक देती है।
दूसरी वजह यह है कि लोग अक्सर ब्लड टेस्ट को गंभीर बीमारी से जोड़ते हैं, जबकि B12 का टेस्ट बहुत सामान्य और सरल होता है।
विटामिन B12 और मानसिक स्वास्थ्य (Mind-Body Connection)

यह एक ऐसा क्षेत्र है जो अक्सर अनदेखा रह जाता है।
जब शरीर में B12 कम होता है, तो दिमाग के अंदर बनने वाले neurotransmitters प्रभावित हो जाते हैं।
इससे—
- मूड स्विंग
- बेचैनी
- घबराहट
- अवसाद जैसा महसूस होना
जैसी स्थितियाँ जन्म ले सकती हैं।
यह मानसिक स्वास्थ्य की समस्या नहीं होती—
बल्कि दिमाग को ऊर्जा न मिल पाने का असर होता है।
क्या विटामिन B12 की कमी पूरी तरह ठीक हो सकती है?
अच्छी बात यह है कि सही समय पर पहचाने जाने पर B12 की कमी को आसानी से ठीक किया जा सकता है।
✔ हल्की कमी
डाइट सुधारकर और हल्के सप्लीमेंट्स लेकर ठीक हो जाती है।
✔ मध्यम कमी
मासिक या साप्ताहिक सप्लीमेंट्स से सुधार आता है।
✔ गंभीर कमी
कई मामलों में डॉक्टर इंजेक्शन देते हैं, जिससे पोषक तत्व सीधे शरीर में पहुँचता है और अवशोषण की समस्या दूर की जा सकती है।
विटामिन B12 को जीवनभर कैसे संतुलित रखें?
- दिन की शुरुआत प्रोटीन युक्त भोजन से करें
- हफ्ते में 2–3 बार डेयरी प्रोडक्ट्स या अंडे शामिल करें
- यदि आप वेगन हैं तो फोर्टिफाइड फूड जरूर लें
- रोजाना 20–30 मिनट धूप में समय बिताएँ
- तनाव कम करने की कोशिश करें
- हर छह महीने में जरूरी ब्लड टेस्ट कराएँ
यह छोटे-छोटे कदम आपकी ऊर्जा, मूड, ध्यान और स्ट्रेंथ को लंबे समय तक संतुलित रखने में मदद करते हैं।
हमारा शरीर हमारी सबसे वफादार साथी की तरह है—
हम कदम बढ़ाते हैं, यह हमारा साथ देता है;
हम थकते हैं, यह हमें आराम का संकेत देता है;
हम तनाव में होते हैं, यह अपने अंदाज़ में हमें सतर्क करता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
विटामिन B12 की कमी आज के समय में बेहद सामान्य होती जा रही है, खासकर उन लोगों में जो शाकाहारी हैं, लगातार तनाव में रहते हैं या पेट से संबंधित दवाइयाँ लेते हैं। इस लेख में बताए गए कारण, लक्षण और उपाय आपको अपने स्वास्थ्य की बेहतर समझ देंगे। यदि समय रहते सतर्कता बरती जाए तो इस कमी को आसानी से ठीक किया जा सकता है।
विटामिन B12 की कमी एक साधारण समस्या है,
लेकिन समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह जीवन की गुणवत्ता को गहराई से प्रभावित कर सकती है।
शरीर की हर थकान कोई शिकायत नहीं होती,
कई बार यह एक विनम्र आग्रह होता है—
“कृपया मेरी जरूरतों को समझो।”
अगर हम इस संकेत को सुन लें,
तो न केवल हमारा शरीर स्वस्थ रहेगा,
बल्कि हमारी जिंदगी में एक नई चमक, नई ऊर्जा और नया आत्मविश्वास भी लौट आएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. विटामिन B12 की कमी का सबसे बड़ा कारण क्या है?
सबसे बड़ा कारण डाइट में पर्याप्त B12 का न होना है, खासकर उन लोगों में जो शाकाहारी या वेगन डाइट फॉलो करते हैं। इसके अलावा पेट की समस्याएँ या दवाइयाँ भी कमी का कारण बन सकती हैं।
2. क्या विटामिन B12 की कमी से कमजोरी और चक्कर आ सकते हैं?
हाँ, B12 की कमी से शरीर में ऊर्जा उत्पादन धीमा हो जाता है, जिससे लगातार कमजोरी, थकान और चक्कर आने जैसी समस्याएँ शुरू हो सकती हैं।
3. क्या केवल शाकाहारी लोगों में ही B12 की कमी होती है?
नहीं, गैर-शाकाहारी लोग भी कमी का शिकार हो सकते हैं यदि उनका शरीर B12 को ठीक से अवशोषित नहीं कर पा रहा हो या लंबे समय तक एसिडिटी/डायबिटीज की दवाएँ ले रहे हों।
4. विटामिन B12 का लेवल बढ़ाने में कितना समय लगता है?
कमी हल्की हो तो 2–4 सप्ताह में सुधार दिखने लगता है। गंभीर कमी होने पर 2–3 महीने तक सप्लीमेंट या इंजेक्शन की जरूरत पड़ सकती है।
5. क्या B12 की कमी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है?
हाँ, कम B12 से दिमाग को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता, जिससे चिंता, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग और कभी-कभी डिप्रेशन जैसा व्यवहार भी हो सकता है।
